Trump 100% Tariff on China 202

अमेरिका बनाम चीन व्यापार युद्ध का नया अध्याय | Aajad News

Trump China Trade War 2025 से जुड़ी यह खबर अमेरिका-चीन संबंधों में बड़ा मोड़ साबित हो सकती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर 100% टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी है।
यह फैसला 1 नवंबर 2025 से लागू होगा। ट्रंप का कहना है कि चीन “दुनिया को आर्थिक रूप से बंधक बनाने की कोशिश कर रहा है”,

🌎 ट्रंप का बड़ा कदम — “अब अमेरिका नहीं झुकेगा”

ट्रंप ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा —

“चीन पिछले कई सालों से दुर्लभ खनिजों (Rare Earth Materials) पर दुनिया की पकड़ कमजोर कर रहा है।
अब समय आ गया है कि अमेरिका भी अपने उद्योग और टेक्नोलॉजी को बचाने के लिए सख्त कदम उठाए।”

इस ऐलान के साथ अमेरिका ने चीन से आने वाले सभी प्रमुख उत्पादों पर 100% नया टैरिफ लागू करने की घोषणा की है।
पहले से 30% टैरिफ पहले ही लागू है — यानी अब कुल 130% टैरिफ लगेगा।

⚙️ चीन क्यों नाराज हुआ?

चीन ने हाल ही में 9 अक्टूबर को दुर्लभ खनिजों (Rare Earth Minerals) के निर्यात पर सख्त नियंत्रण लगाए थे। इन खनिजों का इस्तेमाल मोबाइल, इलेक्ट्रिक कार, मिसाइल सिस्टम, और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में होता है। दुनिया की 70% rare earth supply चीन से आती है — और अब चीन के इस कदम से अमेरिका की सप्लाई चेन हिल गई है।

ट्रंप ने चीन के इस कदम को “Economic Weapon” बताते हुए कहा:

“चीन इन खनिजों के जरिए पूरी दुनिया को बंधक बनाना चाहता है — अब यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

💰 कौन-कौन से सेक्टर पर असर पड़ेगा?

1️⃣ टेक्नोलॉजी सेक्टर:
Apple, Intel, NVIDIA जैसी कंपनियों के प्रोडक्शन कॉस्ट में तेज़ बढ़ोतरी होगी।

2️⃣ ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री:
EV बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स महंगे हो सकते हैं क्योंकि इनमें rare earth का उपयोग होता है।

3️⃣ ग्लोबल ट्रेड मार्केट:
एशिया से यूरोप तक की सप्लाई चेन में नई रुकावटें आ सकती हैं।

📉 ग्लोबल मार्केट में झटका

इस घोषणा के बाद एशियाई बाजारों में तुरंत असर देखा गया —

इस घोषणा के बाद एशियाई बाजारों में तुरंत असर देखा गया —

  • हांगकांग इंडेक्स 1.8% गिरा,
  • शंघाई कंपोजिट 1.2% नीचे गया,
  • वहीं अमेरिकी Dow Jones Futures में भी 0.9% की गिरावट आई।

ट्रेड एनालिस्ट्स का कहना है कि अगर ये टैरिफ लंबे समय तक रहा,

तो यह नई ग्लोबल मंदी (Global Slowdown 2025) की शुरुआत भी कर सकता है।

🧩 चीन की प्रतिक्रिया

बीजिंग से जारी बयान में चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा —

“अमेरिका का यह कदम विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों का उल्लंघन है।
चीन अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।”

साथ ही, चीन ने संकेत दिया है कि वह अमेरिकी सॉफ्टवेयर और मशीनरी निर्यात पर जवाबी टैरिफ लगाने की तैयारी में है।

🧠 Rare Earth Materials क्या हैं?

Rare Earth Minerals 17 तत्वों का समूह है, जो आधुनिक तकनीक की रीढ़ हैं —
इनका इस्तेमाल किया जाता है:

  • मोबाइल फोन और लैपटॉप चिप्स में
  • इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी में
  • सैटेलाइट और मिसाइल गाइडेंस सिस्टम में
  • MRI मशीनों में

🔹 चीन के पास इनका 60% से ज़्यादा भंडार है
🔹 अमेरिका, जापान और भारत इस पर निर्भर हैं

🔍 विशेषज्ञों की राय

कॉनॉमिक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि
यह कदम अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर 2.0 की शुरुआत हो सकता है।

अमेरिका पहले भी 2018 में ऐसे टैरिफ लगा चुका है,
लेकिन 2025 में यह मामला ज्यादा गंभीर इसलिए है क्योंकि अब इसमें टेक्नोलॉजी और मिलिट्री सेक्टर दोनों शामिल हैं।

“यह सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी डोमिनेंस की जंग है।”
— प्रोफेसर जॉर्ज हेन्स, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी

📊 भारत पर क्या असर पड़ेगा?

भारत का अमेरिका और चीन दोनों से व्यापार जुड़ा है —
लेकिन यह स्थिति भारत के लिए एक बड़ा अवसर भी ला सकती है:

  1. भारत Rare Earth प्रोसेसिंग के लिए वैकल्पिक केंद्र बन सकता है।
  2. अमेरिकी कंपनियाँ “China+1 Policy” के तहत भारत में निवेश बढ़ा सकती हैं।
  3. मेक इन इंडिया प्रोग्राम को बढ़ावा मिलेगा।

“ट्रंप बनाम चीन” का यह नया अध्याय आने वाले महीनों में वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेगा।
एक तरफ ट्रंप अमेरिका के हितों की रक्षा की बात कर रहे हैं,
तो दूसरी ओर चीन इसे “आर्थिक आक्रमण” बता रहा है।

अगर दोनों देशों में यह तनातनी लंबी चली,
तो दुनिया एक बार फिर 2020 जैसी ट्रेड वॉर और मंदी के दौर में लौट सकती है।

🌏 अब देखना यह होगा कि 1 नवंबर से लागू होने वाला यह टैरिफ
दुनिया को किस दिशा में ले जाएगा — सहयोग या संघर्ष?

यह भी पढ़ें: भारत की अर्थव्यवस्था 2025 में कहाँ खड़ी है?

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