मोदी सरकार 2025

भारत में जब 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने,
तो जनता के मन में एक ही उम्मीद थी —
👉 “अब देश बदलेगा!”

साल 2025 तक आते-आते, मोदी सरकार के कार्यकाल को एक दशक से ज़्यादा हो चुका है।
कई लोग कहते हैं कि भारत अब नया भारत बन चुका है,
तो कुछ लोग सवाल करते हैं — क्या ये वही विकास है जिसका वादा किया गया था?

🔹 1️⃣ वादों से हकीकत तक: मोदी सरकार की प्रमुख योजनाएँ

पिछले दस सालों में मोदी सरकार ने कई बड़ी योजनाएँ शुरू कीं:

  • प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) — हर गरीब को घर।
  • उज्ज्वला योजना — महिलाओं को LPG कनेक्शन।
  • जन धन योजना — हर नागरिक का बैंक खाता।
  • आयुष्मान भारत योजना — स्वास्थ्य सुरक्षा की नई पहल।
  • Digital India, Startup India, Make in India — टेक्नोलॉजी और रोजगार पर फोकस।

📊 आंकड़ों के मुताबिक़:

  • अब तक 12 करोड़ से अधिक जन धन खाते खुले।
  • 9 करोड़ से ज्यादा उज्ज्वला कनेक्शन दिए गए।
  • PM Awas Yojana के तहत लाखों लोगों को घर मिले।

लेकिन सवाल यह है —
क्या ये योजनाएँ जमीन पर उतनी ही असरदार हैं, जितनी कागज़ पर दिखती हैं?

🔹 2️⃣ आर्थिक मोर्चा: विकास या महंगाई का दबाव?

भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।
लेकिन आम आदमी पूछता है —

“GDP बढ़ रही है, पर मेरी जेब क्यों नहीं?”

💰 महंगाई, बेरोजगारी, और कृषि संकट
अब भी भारत की अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौतियाँ हैं।

  • 2025 में खुदरा महंगाई दर (CPI) 6.1% के पार रही।
  • युवाओं में बेरोजगारी दर 7.8% तक पहुंच गई।
  • किसान आज भी MSP और कर्ज़माफी की उम्मीद में हैं।

यानी “5 ट्रिलियन इकोनॉमी” का सपना अभी अधूरा है —
विकास हो रहा है, लेकिन असमानता भी बढ़ी है।

🔹 3️⃣ विदेश नीति: मोदी ब्रांड या भारत की नई पहचान?

मोदी सरकार ने विदेश नीति को Brand India बना दिया है।

  • G20 Summit 2023
  • “One Earth, One Family, One Future”
  • और दुनिया में भारत की सशक्त भूमिका

यह सब मोदी की छवि को “Global Leader” बनाता है।
लेकिन आलोचक कहते हैं —

“विदेशी मंचों पर तालियाँ मिलती हैं, पर घरेलू मोर्चे पर सवाल बाकी हैं।”


🔹 4️⃣ हिंदुत्व और राष्ट्रवाद: वोट बैंक या विचारधारा?

मोदी सरकार का सबसे बड़ा राजनीतिक हथियार रहा है — राष्ट्रवाद और हिंदुत्व
राम मंदिर का निर्माण, 370 का हटना, CAA, NRC जैसे निर्णय —
इनसे एक वर्ग मोदी को “हिंदू राष्ट्र का रक्षक” मानता है।
तो दूसरा वर्ग कहता है —

“देश को धर्म के नाम पर बाँटा जा रहा है।”

👉 सच ये है कि मोदी सरकार ने भावनात्मक राजनीति को आर्थिक सुधारों से ज्यादा असरदार बनाया है।

🔹 5️⃣ मीडिया और स्वतंत्रता: नियंत्रण या नैरेटिव?

कई रिपोर्टों के अनुसार,
भारत की प्रेस फ्रीडम इंडेक्स रैंकिंग 2025 में 161वें स्थान पर है।
आलोचकों का आरोप है कि मीडिया अब सरकार के नियंत्रण में है,
जबकि समर्थकों का कहना है कि “Fake News रोकने के लिए नियंत्रण ज़रूरी है।”

सवाल वही पुराना है —

“लोकतंत्र में आवाज़ों को दबाना सुधार है या सेंसरशिप?”

🔹 6️⃣ जनता की राय — दो भारत?

एक भारत कहता है:

“देश मोदी के नेतृत्व में दुनिया की सुपरपावर बन रहा है।”

दूसरा भारत कहता है:

“गरीबी, महंगाई और रोजगार का संकट पहले से बड़ा हो गया है।”

शायद सच इन दोनों के बीच कहीं है —
जहाँ विकास हुआ भी है और अधूरा भी रहा है।

🔹 7️⃣ 2025 में भारत: वादे पूरे या अधूरे?

पिछले 10 सालों में मोदी सरकार ने जो कुछ किया,
वो भारत के इतिहास का सबसे बड़ा सामाजिक-राजनीतिक प्रयोग था।
लेकिन अब जब 2025 में जनता अगले चुनाव की तैयारी कर रही है,
तो वही पुराने सवाल फिर से लौट आए हैं —

  • “हर घर नौकरी कब आएगी?”
  • “महंगाई कब रुकेगी?”
  • “किसान की आय दोगुनी कब होगी?”

🧠मोदी युग का मूल्यांकन

मोदी सरकार का युग सिर्फ एक राजनीतिक शासन नहीं,
बल्कि एक मानसिक क्रांति है — जिसने जनता को आशा, विश्वास और विभाजन — तीनों दिए हैं।

📜 इतिहास जब इस दौर को लिखेगा,
तो वह इसे “Transformation with Tension” के नाम से याद रखेगा —
जहाँ बदलाव भी हुआ, और बहस भी।

👉 यह भी पड़े – भारत की अर्थव्यवस्था 2025 में कहाँ खड़ी है? जानिए नए बदलाव और चुनौतियाँ |

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